卷六·詞賦之屬下編一(下)

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襄平侯韓信。

     【譯文】 将軍勇猛無比,輔佐君主征戰。

    出行不辱使命,降楚暫為權宜。

    論功更顯德行,謙讓化解紛難。

    最後北降匈奴,命喪雲中可歎。

    以上是将軍襄平侯韓信。

     岩岩将軍,帶武佩威。

    禦雄乘險,難困不違。

    仇滅主定,四海是桢。

    功成食土,德被遐迩。

    右,将軍棘津侯陳武。

     【譯文】 将軍風格嚴整,勇武複又威嚴。

    負勇專趨危險,從來不辭艱難。

    仇滅漢主稱帝,國家賴為骨幹。

    立功享受食邑,美德遠近稱傳。

    以上是将軍棘津侯陳武。

     晏晏曲成,輿從龍騰。

    安危從主,赤曜以升。

    赫赫皇皇,道彌光明。

    惟德禦國,流及後萌。

    右,曲成侯蟲達。

     【譯文】 曲成性情安靜,始終輔佐漢興。

    與主共患難,漢家因此功成。

    盛大輝煌無比,品德更顯光明。

    治國全憑美德,福及子孫不輕。

    右,曲成侯蟲達。

     肅肅禦史,以武以文。

    相趙距呂,志安君身。

    征詣行所,如意不全①。

    天秩邑土,勳乃永存。

    右,禦史大夫汾陰侯周昌。

     【注釋】 ①如意:趙王之名。

    周昌曾任趙王相。

     【譯文】 禦史嚴肅恭謹,威武溫文兩全。

    輔佐趙王拒呂,志在保護趙王。

    诏書調往行在,趙王因此命完。

    後來享祿封邑,功勳後世永傳。

    以上是禦史大夫汾陰侯周昌。

     邑邑将軍①,育養烝徒。

    建謀正直,行不匿邪。

    入軍讨敵,項定天都。

    佩雀雙印②,百裡為家。

    右,将軍青陽侯王吸。

     【注釋】 ①邑邑:和順。

     ②佩雀:列侯印飾。

     【譯文】 将軍性情和順,愛護士卒如子。

    出謀劃策正直,行事光明無匿。

    臨戰深入敵陣,滅楚四海歸一。

    論功封為列侯,食邑方圓百裡。

    以上是将軍青陽侯王吸。

     張衡 張衡簡介參見卷四。

     绶笥銘 【題解】 绶,一種絲帶,常用來拴玉和印;笥(sì),一種盛物用的方形竹器。

    此文系張衡代南陽太守鮑德而作,旨在贊頌皇帝所賜的绶與笥,并進而贊頌皇帝對鮑德的浩蕩洪恩。

    晉人陸機贊其文筆“博約而溫潤”,誠不為虛。

     南陽太守鮑德①,有诏所賜先公绶笥,傳世用之。

    時德更理笥,衡時為德主簿②,作銘曰: 【注釋】 ①南陽:郡名。

    治所在今河南南陽。

    太守:官名。

    管理一郡政事,秩二千石。

     ②主簿:官名。

    負責文書簿籍,掌管印鑒,為掾史領袖,漢時中央各機構及地方郡、縣官府都設有主簿。

     【譯文】 南陽太守鮑德,收有皇帝下诏賞賜給他先輩的印绶和印盒,是他們家的傳世之寶。

    現在,鮑德又有使用印盒的機會,張衡是鮑德的主簿,作銘如下: 懿矣茲笥,爰藏寶珍。

    冠纓組履①,文章日信②。

    皇用我賜,俾作帝臣。

    服其令服,鸾封艾缗③。

    天祚明德④,大赉福仁⑤。

    垂光厥世,子孫克神。

    厥器維舊,中實維新。

    周公惟事,七涓有鄰⑥。

     【注釋】 ①纓:絲、線等做成的穗狀飾物。

     ②文章:錯雜的色彩或花紋。

     ③艾:綠色。

    缗(mín):此指绶。

    《漢官儀》:“二千石以上,銀印青绶。

    ” ④天祚:天賜福佑。

     ⑤赉(lài):賜予。

     ⑥七涓:所指不詳。

     【譯文】 多麼美好啊,這個小印盒,用來收藏寶珍之物。

    纓穗覆蓋在它的上面,交結縱橫,色彩花紋越來越亮麗缤紛。

    先輩所用,賞賜于我,讓我做皇帝的臣子。

    穿上命服,用鸾鏡之匣封藏我的綠色官绶。

    德行光明,天賜福佑。

    榮耀于世,佑護子孫。

    印盒雖舊,所藏卻新。

    但行周公之事,七涓有鄰。

     崔骃 崔骃(?—92),字亭伯,東漢涿郡安平(今河北深州)人。

    在太學念書時即與班固、傅毅齊名。

    和帝時入車騎将軍窦憲府任職,出為長岑長,不赴任而歸。

    崔骃學識淵博,思想銳利。

    史載他在太學讀書時,曾因讀史有感而與同學孔僖論及漢武帝功過,被另一同學梁郁告發,險些喪命。

    所著詩、賦、銘、頌等共二十一篇。

    《後漢書》有傳。

     官箴三首 【題解】 後漢三公(太尉、司徒、司空)為百官之長,協天子而治天下,責深任重。

    一旦天象稍不正常,三公輕則引咎辭職,重則自裁以謝天下。

    此文舍司空而以大理代之,實因大理負責刑獄事,在當時也是極受重視的事務。

    人命關天,不可不慎。

    兩漢重視研讨官吏尤其是高層官吏的責任義務問題。

    不但在朝任職者本人思考這一問題,在野之儒生也畢生研究它。

    崔骃隻不過偶為小官,卻可寫箴來勸誡太尉、司徒、大理,自然是風氣感染,也反映了時代的特點。

     太尉箴① 天官冢宰②,庶僚之率。

    師錫有帝③,命虞作尉。

    爰葉台極④,妥平國域⑤。

    制軍诘禁,王旅惟式。

    九州用綏,群公鹹治。

    幹戈載戢⑥,宿纏其紀⑦。

    上之雲據,下之雲戴。

    苟非其人,我帝載⑧。

    昔周人思文公,而《召南》詠《甘棠》。

    昆吾隆夏⑨,伊摯盛商⑩。

    季世頗僻,禮用不匡。

    無曰我強,莫餘敢喪。

    無曰我大,輕戰好殺。

    纣師百萬,卒以不艾。

    宰臣司馬,敢告在際。

     【注釋】 ①太尉:秦時即設此官,負責全國軍事。

    漢朝沿襲而設,地位與丞相相當。

    漢武帝時改名為大司馬。

     ②天官冢宰:《周禮》中設的官名,負責總領百官。

    此處即指太尉。

     ③師:衆人。

     ④爰:發語詞,無實在意義。

     ⑤妥:安定。

     ⑥戢(jí):收藏兵器。

     ⑦宿纏其紀:指天上星宿運行不失次序。

     ⑧(dù):敗壞。

    載:事業。

     ⑨昆吾:古國名。

    是夏的諸侯國。

     ⑩伊摯:即伊尹。

     【譯文】 古設天官冢宰,位居百官之上。

    堯納衆人意見,命舜任此職掌。

    協贊皇家制度,安定國家四方。

    整治軍隊有法,王師有模有樣。

    天下因此無事,百僚各守其崗。

    兵戎不再興起,星運不失其常。

    帝稱有所依賴,民喜用人适當。

    太尉若非此人,帝業必緻敗喪。

    周人曾思文公,《召南》歌詠《甘棠》。

    昆吾輔夏興隆,伊尹贊輔盛商。

    末世一蹶不振,禮廢無人扶匡。

    莫說強盛無比,誰能覆我家邦。

    莫說國土無邊,黩武殺虐何妨。

    殷纣雄師百萬,到底無助滅亡。

    敬告任此職者,受命之際思量。

     司徒箴① 天監在下,仁德是興。

    乃立司徒,亂茲黎烝②。

    茫茫庶域,率土祁祁③。

    民具爾瞻,四方是維。

    乾乾夕惕④,靡怠靡違。

    恪恭爾職,以勤王機。

    敬敷五教⑤,九德鹹事⑥。

    啬人用章⑦,黔氓是富⑧。

    無曰餘恃,忘餘爾輔。

    無曰餘聖,以忽執政。

    匪用其良,乃荒厥命。

    庶績不怡⑨,疚于爾祿。

    豐其折右⑩,而鼎《覆》其(11)。

    《書》歌股肱(12),《詩》刺南山(13)。

    尹氏不堪,國度斯愆。

    徒臣司衆,敢告執藩。

     【注釋】 ①司徒:官名。

    漢改丞相為大司徒,與大司馬、大司空并稱三公。

    後去“大”字稱司徒。

     ②亂:治理。

     ③祁祁:繁盛的樣子。

     ④乾乾夕惕:《周易·乾卦》九三爻辭:“君子終日乾乾,夕惕若厲,無咎。

    ”意指君子小心謹慎行事,堅持不懈,必無災難。

     ⑤五教:指仁、義、禮、智、信。

     ⑥九德:指寬而栗,溫而立,願而恭,亂而敬,擾而毅,直而溫,簡而廉,剛而塞,強而義。

     ⑦啬人:農夫。

     ⑧黔氓:指老百姓。

     ⑨怡:滿意。

     ⑩豐其折右:《周易·豐卦》九三爻辭:“豐其沛,日中見沫,折其右肱,無咎。

    ”《象》曰:“豐其沛,不可大事也;折其右肱,終不可用也。

    ” (11)鼎覆其:《周易·鼎卦》九四爻辭:“鼎折足,覆公。

    ”喻不能勝其任,而緻敗事。

    ,膳。

     (12)《書》歌股肱:《尚書》:“股肱惰哉,萬事堕哉。

    ” (13)《詩》刺南山:《節南山》是《詩經》裡的一篇,據說是譏刺幽王的。

    他任用尹氏為太師,尹氏卻胡作非為,惹得天怒人怨,國家瀕于危亡。

     【譯文】 上天監視下土,仁德因以産生。

    于是設立司徒,治理天下百姓。

    國家幅員遼闊,四海人口繁盛。

    全都仰望司徒,統治賴此安甯。

    終日勤勤懇懇,不敢稍違暫停。

    謹守你的職位,助王施發号令。

    恭敬弘揚五教,并将九德奉行。

    農人因以力田,百姓因此富庶。

    莫說我是靠山,忘你須助朕躬。

    莫說我很聖明,将你職事放松。

    此職用非賢人,那将荒廢任命。

    政事處理不好,拿着俸祿臉紅。

    《豐卦》告誡折臂,《鼎卦》喻以無功。

    《尚書》勉勵輔臣,《詩經》譏諷公卿。

    官人不勝其任,國政因此失衡。

    司徒管理百僚,以此告誡望聽。

     大理箴① 邈矣臯陶②,翊唐作士。

    設為犴狴③,九刑允理④。

    如石之平,如淵之清。

    三槐九棘⑤,以質以聽。

    罪人斯殛⑥,兇旅斯并。

    熙帝載⑦,旁施作明。

    昔在仲尼,哀矜聖人⑧。

    子罕禮刑,衛人釋艱。

    釋之其忠⑨,勳亮孝文。

    于公哀寡⑩,定國廣門。

    敻哉邈矣,舊訓不遵。

    主慢臣驕,虐用其民。

    賞以崇欲,刑以肆忿。

    纣作炮烙,周人滅殷。

    夏用淫刑,湯誓其軍。

    衛鞅酷烈(11),卒殒于秦。

    不疑加害(12),禍不反身。

    嗟茲大理,慎于爾官。

    賞不可不思,斷不可不虔。

    或有忠而被害,或有孝而見殘。

    吳沉伍胥(13),殷割比幹(14)。

    莫遂爾情,是截是刑。

    無遂爾心,以速以殛。

    天鑒在顔,無細不錄。

    福善災惡,其效甚速。

    理臣思律,敢告執獄。

     【注釋】 ①大理:古代掌刑獄之官。

     ②臯陶:舜時為大理。

     ③犴狴(ànbì):監獄。

     ④九刑:指墨、劓、剕、宮、大辟、流、贖、鞭、撲。

     ⑤三槐九棘:《周禮》:“三槐九棘,公卿于下聽訟。

    ” ⑥殛(jí):誅殺。

     ⑦熙:光大。

     ⑧昔在仲尼,哀矜聖人:孔子很重視刑獄,他說:“聽訟,吾猶人也,必也使無訟乎?”(《論語·顔淵》)。

    又《論語·子張》有審案時“如得其情,則哀矜而勿喜”的話。

     ⑨釋之:即張釋之。

    漢文帝時為廷尉,斷獄公允。

     ⑩于公:即于定國之父,西漢時人。

    據載他治獄公平,多有陰德。

    于公所住村莊闾門壞,村人一起修治。

    于公告訴鄉人說門修高大些,以便高車大馬能進村。

    因他自信善有善報,兒子将來必能出人頭地,果然于定國官至丞相。

     (11)衛鞅:即商鞅。

     (12)不疑:指隽不疑,字曼倩,西漢昭帝時人,治《春秋》。

    任京兆尹時,有一男子自稱是漢武帝已故的太子,來到長安,居民官吏圍觀者數萬人,丞相、禦史也不知怎麼處理才好,不疑喝令屬下将其人捆送入獄,引《春秋》之意解釋。

    昭帝及大将軍霍光深為贊賞,歎道:“公卿大臣還是得用懂經術、能辨大是大非的人。

    ” (13)伍胥:即伍子胥。

    他死後吳王夫差沉其屍于江。

     (14)比幹:殷纣王聞說比幹心有七竅,殺死比幹而剖取其心。

     【譯文】 遠古時代的臯陶,為堯輔佐之臣。

    設立囚牢監獄,刑罰處置公允。

    公平好似磨石,清澈如水無隐。

    三槐九棘之下,公卿共聚參問。

    犯人得以正法,叛賊因此伏訊。

    帝業光大康甯,政事無不明審。

    當年聖人孔丘,感歎刑罰酷深。

    子罕禮刑治國,衛人因此脫困。

    釋之盡忠報國,美名人傳孝文。

    于公哀憐孤寡,定國驷馬入門。

    古意蕩然無影,先賢所訓不遵。

    君臣淩傲無道,殘害天下子民。

    封賞獎勵貪欲,濫刑以洩私憤。

    纣王制作炮烙,周人因此滅殷。

    夏政刑罰無度,商湯因此揮軍。

    商鞅用法嚴酷,終于斃命在秦。

    不疑依法斷案,災難未見降臨。

    擔任大理之人,千萬保持謹慎。

    獎賞需要三思,斷案不可不謹。

    否則忠臣被害,要麼孝子殘損。

    伍子胥屍沉吳水,比幹被殷纣剖心。

    不要徇私順意,砍殺定于一尊。

    不要為所欲為,加速自己亡身。

    須知蒼天在上,小事無不錄存。

    獎善懲惡無爽,報應快似有神。

    法官要細思律令,以此告誡望聽。

     崔瑗 崔瑗(77—141),字子玉,東漢涿郡安平(今河北安平)人,崔骃(見前篇《官箴三首》作者小傳)之子。

    少孤,及長即銳志于學,能盡傳父業。

    曾任汲縣令、濟北相等官職。

    長于文辭,尤長于韻文,亦通曉天文曆數。

    所著賦、碑、銘、箴等五十七篇,其中《南陽文學官志》稱于後世。

    他文辭犀利而有光彩,為東漢一大韻文作家。

     座右銘 【題解】 這是崔瑗為自己作的規誡文字,大體以清靜淡泊、退讓守拙為主旨。

    雖似老生常談,但亦足以警醒世人。

     無道人之短,無說己之長。

    施人慎勿念,受施慎忽忘。

    世譽不足慕,惟仁為紀綱。

    隐心而後動①,謗議容何傷。

    無使名過實,守愚聖所臧②。

    在涅貴不淄③,暧暧内含光④。

    柔弱生之徒,老氏誡剛強⑤。

    行行鄙夫志⑥,悠悠故難量。

    慎言節飲食,知足勝不祥。

    行之苟有恒,久久自芬芳。

     【注釋】 ①隐心:恻隐之心。

    孟子說:“恻隐之心,仁之端也。

    ” ②臧:善,贊譽。

     ③涅:一種礦物,古代用作黑色染料。

    淄:黑色。

     ④暧暧(ài):昏昧。

     ⑤柔弱生之徒,老氏誡剛強:老子《道德經》:“人之生也柔弱,其死也堅強;萬物草木之生也柔脆,其死也枯槁。

    故堅強者死之徒,柔弱者生之徒。

    ”徒,同類。

    老氏,指老子。

    道家學說的創立者。

     ⑥行行:剛健的樣子。

     【譯文】 不要評說别人的短處,不要誇耀自己的專長。

    施惠于人切勿念念不忘,受人恩惠不要過後就忘。

    世間的虛譽不足羨慕,隻有仁義才是做人的準則。

    懷抱恻隐之心再行動,诽謗非議于我有什麼傷害呢?不要使自己的名聲超過實際,守拙養晦為聖人所稱揚。

    處污穢貴在不為所染,在黑暗也能内含芒光。

    柔弱是生命的象征啊,所以老子諄諄告誡不要剛強。

    且看那貌似剛健的鄙夫,他的禍殃可是難以估量。

    慎重言辭,節制飲食,懂得滿足遠遠勝過遭受不祥。

    照此行動,持之以恒,天長日久,受益無窮。

     鞏玮 鞏玮,東漢時人,生平事迹不詳。

     光武濟陽宮碑 【題解】 文章大緻陳述了光武帝劉秀從出生到起兵、稱帝的過程。

    文中保留了一些神異傳說,對光武帝開後漢基業的功績,作了熱情贊頌,也充分表現了作者的敬仰企慕之情。

     惟漢再受命,曰世祖光武皇帝。

    考南頓君①,初為濟陽令②。

    濟陽有武帝行過宮,常封閉。

    帝将生,考以令舍下濕,開宮後殿居之。

    建平元年十二月甲子夜③,帝生。

    時有赤光,室中皆明。

    使蔔者王長蔔之,長曰:“此善事不可言。

    ”歲有嘉禾,一莖生九穗,長于凡禾,因為尊諱④。

     【注釋】 ①考:父親。

    南頓:漢縣名。

    故城在今河南項城西。

    劉秀父親劉欽曾任南頓縣令。

     ②濟陽:戰國魏邑,漢置縣,故城在今河南蘭考。

     ③建平:漢哀帝年号(前6—前5)。

     ④“歲有嘉禾”幾句:此叙劉秀名字的來曆。

    因嘉禾獨秀,故名“秀”。

     【譯文】 漢代第二次接受天命,稱世祖光武皇帝。

    皇帝的父親南頓縣令,起先任濟陽縣令。

    濟陽有武帝的行宮,平常總封閉着。

    光武帝出生前,他父親因為縣府潮濕,打開行宮的後殿住在那裡。

    漢哀帝建平元年十二月甲子日的晚上,皇帝出生。

    當時出現紅光,整個屋子都被照亮了。

    讓蔔卦的人王長蔔算這件事,王長說:“這是好事,不可言說。

    ”這一年又出現了特好的禾苗,一根莖杆上長出了九個穗頭,優良于一般的禾苗,因此以“秀”作為皇帝的尊諱。

     王室中微,哀、平短祚①。

    奸臣王莽,偷有神器,十有八年,罪盈惡熟,天人緻誅。

    帝乃龍見白水②,淵躍昆滍③。

    破前隊之衆,殄二公之師④。

    收兵略地,經營河朔,戮力戎功,翼戴更始⑤。

    義不即命,帝位阙焉。

    于是群公諸将,據河、洛之文,葉符瑞之珍⑥,佥曰:“曆數在帝,踐阼允宜。

    ”乃以建武元年六月乙未⑦,即位鄗縣之陽⑧,五成之陌,祀漢配天,不失舊物。

    享國三十六年,方内安,蠻夷率服。

    巡狩泰山,禅梁父,皇代之遐迹,帝者之上儀,罔不畢舉。

    道德餘慶,延于無窮。

    先民有言:“樂,樂其所自生;而禮,不忘其本。

    ”是以虞稱妫汭⑨,姬美周原⑩。

    皇天乃眷,神宮實始于此,厥迹邈哉!所謂神麗顯融,越不可尚。

    小臣河南尹鞏玮,先祖銀艾封侯(11),曆世卿尹,受漢厚恩。

    玮以商箕餘烈(12),郡舉孝廉,為大官丞(13)。

    來在濟陽,顧見神宮。

    追維桑梓褒述之義,用敢作頌。

    頌曰: 【注釋】 ①哀、平短祚:哀、平二帝在位共十三年。

    祚,帝位。

     ②龍見:形容帝王興起的用語。

    下文“淵躍”與此同。

    白水:劉秀起兵在舂陵白水鄉,在今湖北棗陽東,當時屬南陽郡。

     ③昆:即昆陽,漢縣名。

    今河南葉縣。

    滍(zhì):古水名。

    今河南葉縣境内的沙河。

    劉秀在昆陽打敗王尋,尋之士卒争赴溺死,滍水為之不流。

     ④二公:指王尋、王邑。

    尋是王莽朝的大司徒,邑是大司空。

     ⑤更始:王莽被殺後,劉玄被立為帝,号更始。

     ⑥符瑞之珍:事見《後漢書·光武帝紀》:建武元年夏,劉秀“行至鄗,光武先在長安時同舍生強華,自關中奉《赤伏符》曰:‘劉秀發兵逋不道,四夷雲集龍鬥野,四七之際火為主。

    ’” ⑦建武:光武帝年号(25—56)。

     ⑧鄗縣:今河北高邑。

    《光武帝紀》:“于是命有司設壇場于鄗南千秋亭五成陌……即皇帝位。

    ” ⑨妫(ɡuī):水名。

    汭:水流之北。

     ⑩周原:周地的原野,在岐山南,今陝西鳳翔境。

    《詩經·大雅·鲧》:“周原。

    ”意為周原肥沃寬廣。

     (11)銀艾:銀印綠绶。

    绶以艾草染綠,故稱艾。

     (12)商箕:即商代箕子,是商王宗室。

     (13)大官丞:漢少府屬官有大官令、大官丞,掌管飲食。

     【譯文】 漢朝中衰,哀、平二帝在位時短。

    奸臣王莽竊取國家大權,前後十八年之久,罪大惡極,招來天人的共同誅伐。

    皇帝于是起兵白水,在昆陽和滍水初建功勳。

    擊敗王莽的前軍,消滅了王尋、王邑的軍隊。

    聚集兵卒攻占土地,治理黃河以北的廣大地區,齊心合力于軍功大業,謹慎地擁戴更始帝劉玄。

    又因為道義而不即受天命,帝位暫時空缺在那裡。

    這時衆謀士和将領根據《周易》之理,依照《赤伏符》的吉言,都說“天道更替就在皇帝身上,應該登位稱帝。

    ”于是在建武元年六月乙未日,即位于鄗縣之南,在千秋亭五成陌設立壇場,以漢祖配祀天帝,不違舊的規制。

    在位三十六年,國内太平無事,而蠻夷也賓服。

    皇帝巡狩到泰山,封禅于梁父。

    先代的久遠業迹,帝王的崇高儀規,無不一一實行。

    道德規範和對後人的恩澤,延續到無窮無盡。

    過去的人說:“音樂是由于自身的快樂,而禮規是為不忘根本。

    ”因此虞舜稱配于沩水之北,周朝稱美于周原。

    上天眷念,神宮就是此時興建的,這個事迹真是卓著啊。

    所謂神的美德明亮光輝,不可超越而企求。

    小臣河南尹鞏玮,先祖銀印綠绶,賜封侯爵。

    幾代人都任官職,蒙受漢朝厚恩。

    我以商代箕子那樣的剛直品性,被州郡舉薦為孝廉,擔任大官丞。

    來到濟陽,拜見神宮。

    想到褒揚頌美家鄉的意義,因此恭敬地作此頌詞。

    頌詞是: 赫矣炎光,爰耀其輝。

    笃生聖皇,貳漢之微。

    稽度虔則,誕育靈姿。

    黃孽作慝①,篡握天機。

    帝赫斯怒,爰整其師。

    應期潛見,扶陽而飛。

    禍亂克定,群兇殄夷。

    匡複帝載,萬國以綏。

    巡于四嶽②,展義省方③。

    登封降禅④,升于中皇⑤。

    爰茲初基,天命孔彰。

    子子孫孫,保之無疆。

     【注釋】 ①黃孽:王莽自謂土德,尚黃。

     ②四嶽:泰山、華山、恒山、衡山為四嶽。

     ③展義:表現恩義。

     ④封:在泰山上築土為壇祭天,報天之功,稱封。

    禅:在梁父山上辟場祭地,報地之德,稱禅。

     ⑤中皇:中嶽嵩山。

     【譯文】 炎漢之光盛大顯赫,閃耀它的光輝。

    在兩漢交替的衰微時期,生下一代聖明的君王。

    稽考虔敬的法則,誕育靈秀的英姿。

    王莽作惡,篡奪漢朝國柄。

    皇帝神威震怒,整頓軍隊。

    應時出現,借陽氣而騰飛。

    禍亂最終平定,群兇也被消滅。

    匡複帝王的事業,安服萬國異邦。

    巡守于四嶽,普施恩義于四方。

    登封降禅,登上中嶽嵩山。

    基業由此奠定,上天的成命充分顯揚。

    子子孫孫,保佑他們萬壽無疆。

     王升 王升,據《石門頌》一文當為東漢桓帝時人。

    但其人不見于《後漢書》,已不可考。

     石門頌 【題解】 石門在今陝西勉縣,穿山通道長六丈餘,為漢楊厥所開。

    本頌曆述石門開通的意義,贊頌了楊厥的功績。

    其中描寫子午谷險惡的部分使人有如臨其境之感,十分成功。

     惟川靈定位①,川澤股躬,澤有所注,川有所通。

    餘谷之川②,其澤南隆③,八方所達,益域為充。

    高祖受命,興于漢中,道由子午④,出散入秦⑤,建定帝位,以漢诋焉⑥。

    後以子午,塗路澀難⑦,更随圍谷⑧,複通堂先。

    凡此四道,垓鬲尤艱⑨。

    至于永平⑩,其有四年,诏書開餘,鑿通石門。

    中遭元二(11),西夷虐殘,橋梁斷絕,子午複循。

    上則縣峻,屈曲流颠;下則入冥,庼瀉輸淵(12)。

    平阿泉泥,常蔭鮮晏,木石相距,利磨确盤(13)。

    臨危槍砀(14),履尾心寒(15),空輿輕騎,礙弗前(16)。

    惡蟲蔽狩,蛇蛭毒蟃(17)。

    未秋截霜,稼苗夭殘,終年不登,匮之患(18)。

    卑者楚惡(19),尊者弗安,愁苦之難,焉可具言。

    于是明知故司隸校尉楗為武陽楊君厥(20),字孟文,深執忠伉(21),數上奏請。

    有司議駁,君遂執争。

    百遼鹹從,帝用是聽。

    廢子由斯(22),得其度經(23)。

    功饬爾要,敞而晏平,清涼調和,烝烝艾甯。

    至建和二年仲冬上旬(24),漢中太守楗為武陽王升,字稚紀,涉曆山道,推序本原,嘉君明知,美其仁賢,勒石頌德,以明厥勳。

    其辭曰: 【注釋】 ①川靈:水靈。

     ②餘谷:即斜谷。

    餘,通“斜”。

    在今陝西眉縣南。

     ③南隆:南方的地勢高起。

     ④子午:子午道。

    自今陝西西安南穿秦嶺,通往今陝西安康。

     ⑤散:即大散關,在今陝西寶雞西南,為陝西、四川往來的交通要道。

     ⑥诋:通“柢”。

    根基。

     ⑦澀:艱險的意思。

     ⑧圍谷:與下文的“堂先”皆地名。

     ⑨垓(ɡāi):界限。

    鬲:通“隔”。

     ⑩永平:東漢明帝年号(58—75)。

     (11)元二:東漢安帝永初元年(107)、二年合稱。

    其間先零、滇諸羌叛亂,故雲。

     (12)庼:通“傾”。

     (13)确:石多土薄的樣子。

     (14)槍砀:險峻的樣子。

     (15)履尾心寒:比喻心中憂懼,如蹈虎尾。

     (16)礙:為險阻所遮擋。

     (17)蛭(zhì):俗稱螞蟥,吸血的蟲子。

    蟃:毒蟲的名字。

     (18)(něi):饑餓。

     (19)楚:痛楚。

     (20)楗為:漢郡名。

    在今四川彭山東北。

    武陽:漢縣名。

    故城在彭山東。

     (21)伉:中正剛直。

     (22)子:即子午道。

    斯:指石門。

     (23)度:通“渡”。

    經:通“徑”。

     (24)建和:東漢桓帝年号(147—149)。

     【譯文】 川靈定位,大川大澤随之服從,大澤有注入之地,大河有流通之所。

    斜谷中的河流,因為南方地勢高形成大澤,四面八方都能達到,地域寬廣。

    漢高祖承受天命,興起在漢中,經過子午道,出大散關而入三秦,終于建定帝位,使漢中成為漢朝的發祥地。

    後來因為子午道路途過于險惡,就先後開通圍谷與堂先。

    總之這四條道,都十分險峻。

    到了漢孝明帝永平四年,下诏書開通斜谷,鑿通石門。

    中間遭到漢孝安帝永初元年、二年先零、滇諸羌的叛亂,西部少數民族作亂破壞,橋梁都斷絕了,人們便隻好重新走子午道。

    往上往往懸崖陡峻,蜿蜒曲折;向下則為山谷深淵。

    平地則泥沼水澤,常年陰濕,很少坦途,樹木野草與山石雜錯,石多土少凹凸不平。

    而對危險的地勢,人像踩虎豹之尾一樣心驚膽寒,空車輕騎也受阻而無法向前。

    惡蟲和隐蔽的野獸,毒蛇、螞蟥到處都是。

    未到秋天即有嚴霜,莊稼不熟就凋零了,終年不見成熟,饑荒成為禍患。

    平民百姓深受其苦,官長為之寝食不安,其愁苦和艱難,簡直無法詳述。

    明哲的前司隸校尉楗為郡武陽人楊厥先生,字孟文,為人忠直,幾次上奏請命。

    被主管者駁回,先生卻執意不改,于是百官都贊同,皇帝便聽從了。

    廢棄子午道而啟用石門,得到了過往的門徑,這功勞是如此重大而顯要,使得此道敞開而和平,清靖無害,老百姓得到了太平。

    漢孝桓帝建和二年夏曆十一月,漢中太守楗為武陽人王升,字稚紀,跋山涉水,推本溯源,深深贊歎楊先生的明智,稱美他的仁賢,刻石立碑,歌頌楊先生的功德,闡揚他的顯耀功業。

    頌辭如下: 君德明明,爇煥彌光①。

    刾過拾遺,厲清八荒。

    奉魁承杓②,綏億衙疆③。

    春宣聖恩,秋貶若霜。

    無偏蕩蕩④,真雅以方。

    甯靜烝庶⑤,政與乾通。

    輔主匡君,循禮有常。

    鹹曉地理,知世紀綱。

    言必忠義,匪石厥章⑥。

    恢宏大節,谠而益明。

    揆往卓今,謀合朝情。

    釋艱即安,有勳有榮。

    禹鑿龍門,君其繼蹤。

    上順鬥極⑦,下答川皇。

    自南自北,四海攸通。

    君子安樂,庶士悅雍。

    商人鹹憘,農夫永同。

    《春秋》記異,今而紀功。

    垂流億載,世世歎誦。

     【注釋】 ①爇(ruò)煥:光明。

     ②杓:星名。

    北鬥之第五、六、七顆星,亦稱“鬥柄”。

     ③綏億:安定康樂。

     ④蕩蕩:廣大的樣子。

     ⑤烝庶:百姓。

     ⑥匪石:不是石頭。

    比喻貞潔自守,心志堅定。

    《詩經》:“我心匪石,不可轉也。

    ” ⑦鬥極:北鬥星及其所指的北極星。

     【譯文】 先生大德,顯明昭著,光輝彪炳,越發顯揚。

    諷谏過失,拾補缺漏,清正剛直,四海聞名。

    輔弼天子,安撫百姓,平定邊疆。

    春天和暖,宣揚聖化;秋天肅殺,貶谪不義。

    無私無畏,廣大無邊,真誠雅緻,更有方正。

    撫恤百姓,政通人和,上達天意。

    輔佐君主,匡正天下,循禮奉義,有所定式。

    深通地理,知世綱紀。

    言必忠義,堅定不移,佳美顯揚。

    恢宏大度,又講禮儀,風範高雅,正直明智。

    追思往昔,洞鑒當代,深思熟慮,契合當朝。

    解決艱難,轉危為安,有大功勞,又有英名。

    大禹當年,開鑿龍門,先生慕義,追随先聖。

    仰視蒼穹,順從天意;俯視大地,報答地靈。

    從南到北,四海升平。

    君子安樂,士人歡欣。

    商人發達,農夫富足。

    《春秋》經典,記述異聞;如今仿古,銘刻大功。

    流芳億年,世世歌頌。

     蔡邕 蔡邕(132—192),字伯喈,陳留圉(今河南杞縣)人。

    東漢文學家、書法家。

    少時博學,喜愛辭章、數術、天文,妙操音律。

    初為司徒橋玄屬官,出補河平長,旋召任郎中,校書于東觀,遷為議郎。

    熹平四年(175)正“六經”文字,镌刻于碑,立于京師太學門外,稱“熹平石經”。

    後上書論朝政阙失,遭到誣陷,流放朔方。

    遇赦後又亡命十餘年。

    董卓專權時任侍禦史,拜左中郎将。

    從獻帝遷都長安,封高陽鄉侯。

    有《蔡中郎集》,已佚,後人有輯本。

     祖德頌 【題解】 頌,原為《詩經》六義之一,即所謂“美盛德之形容,以其成功,告于神明者也(《毛詩·序》)”。

    如《商頌》《周頌》等。

    後成為一種文體,多用于歌功頌德。

    蔡邕祖上自六世祖蔡勳至祖父蔡攜和父親蔡棱,都明德知禮,孝悌親仁,著有聲望。

    蔡邕亦是笃孝,慎終追遠,頌其祖德,因作是篇。

     昔文王始受命,武王定禍亂,至于成王,太平乃洽①,祥瑞畢降,夫豈後德熙隆漸浸之所通也。

    是以《易》嘉“積善有餘慶”,《詩》稱“子孫保之”,非特王道然也,賢人君子,修仁履德者,亦其有焉。

    昔我烈祖,暨于予考,世載孝友,重以明德,率禮莫違。

    是以靈祇降之休瑞,兔擾馴以昭其仁②,木連理以象其義③。

    斯乃祖祢之遺靈,盛德之所贶也④,豈我童蒙孤稚所克任哉?乃為頌曰: 【注釋】 ①洽:和睦,協調。

     ②擾馴:馴服。

     ③連理:異根草木枝幹連生,舊時以為吉祥之兆。

    《漢書·蔡邕傳》載,邕性笃孝,母親常卧病在床,邕未嘗解襟帶周夜侍奉。

    母卒,在母墓前修廬,動靜以禮。

    有兔馴擾其旁,又木生連理,遠近奇之,多往觀焉。

     ④贶(kuànɡ):賜與,加惠。

     【譯文】 過去,從周文王開始承受天命,周武王平定戰亂而建國分封,至周成王時天下歸于安甯,吉祥福瑞降臨人間,這難道不是先祖們德性光明隆盛,逐漸惠及後代的嗎?所以《周易》贊揚積善有餘慶,《詩經》稱頌為後世子孫永保富貴,不僅僅實行王道的人是這樣,後世修行仁義履行道德的賢達君子也
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