元詩

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6]戟門:古時帝王出行止宿,插戟為門,後變為列戟宮門。

    唐代有設戟之制,按高階官品可于官署或私門立戟。

    因稱顯赫官署或貴顯之家的門為戟門。

    《資治通鑒·唐僖宗光啟三年》記時任廬州刺史的楊行密為淮南節度使高骈複仇,率軍攻入揚州,斥高骈舊将梁缵不盡節,“斬于戟門之外”。

     [67]談麈:即麈談,麈,拂塵。

    《晉書·王衍傳》記王衍說老莊書時,“每捉玉柄麈尾”。

    清高士奇《天祿識馀》謂古人清淡,多執麈尾,因以清淡稱談柄或麈談。

    宋辛棄疾〔滿江紅〕《中秋》詞:“更如今,不聽麈談清,愁如發。

    ” [68]開州:從作者經曆看,此處開州當指今河南濮陽,元時屬大名路。

    蔔居:原意選擇居所,此處意謂遷居。

     [69]旋:疾、快。

     [70]東臯:古人詩中常用,義同東郭、東郊。

    臯,原意為水邊地。

     [71]“貧無”句:意謂雖貧而無當官之累,所以“心常樂”。

     [72]交親:親友。

    漢趙晔《吳越春秋·阖闾内傳》記吳王“棄貢賜之國而滅其交親”。

     [73]蹇(jiǎn減)驢:跛驢。

     [74]濁醪(láo勞):濁酒。

    以糯米釀造的酒,較混濁。

    古詩中時用來指非佳釀。

     [75]張弘範為元初重要将領,在圍攻襄陽,渡江滅宋和崖山追擊戰幾次重要戰役中,都立有功勳。

    兩次被授金虎符,還賜名“拔都”。

    如此人物,卻在這首作于襄陽前線的詩中向往棄官泛湖。

    功名榮耀之時,即思退步抽身,這也是舊時官場的一種相當普遍的心态。

     [76]不虞:無備,欠預料。

    《孫子·謀攻》:“以虞待不虞者勝。

    ” [77]西屬:向西寄付。

    屬,托付,引申為寄付。

     [78]泛五湖:春秋時,範蠡仕越為大夫,佐越王勾踐滅吳,越得以稱霸。

    範蠡以為勾踐為人可同患而難與處安,乃乘扁舟浮于江湖。

    事見《史記》中《貨殖列傳》和《越王勾踐世家》所附《範蠡傳》。

    唐張守節《史記正義》引《國語》,謂範蠡“遂乘輕舟,以浮于五湖,莫知其終極”。

     [79]至元十一年(1274),元軍大舉南下,伯顔統軍,張弘範為先鋒,渡過長江,直驅臨安。

    這首《過江》詩當作于此時。

    這是一首拗體仄韻絕句。

    前兩句極寫軍威,後兩句感慨蒼夷。

    唐劉商《行營即事》詩:“将軍誇寶劍,功在殺人多。

    ”唐曹松《己亥歲》詩:“憑君莫話封侯事,一将功成萬骨枯。

    ”這些詩句都事涉傍人。

    張弘範詩中分明說江南兒女之血,染紅“我軍”戰袍。

    盡管這首絕句詩藝不精,但這兩行詩句足堪傳世。

    又,清席世臣《元詩選癸集》收伯顔《奉使收江南》詩:“劍指青山山欲裂,馬飲長江江欲竭。

    精兵百萬下江南,幹戈不染生靈血。

    ”疑為假托伯顔的步韻詩。

     [80]鼎裂:分裂為三。

    此處為碎裂意。

     [81]這首詩寫南康(今江西星子)落星寺,寺因落星石得名。

    也寫到廬山,因廬山與落星石相對,作者想象它是女娲氏所煉之石墜在世間,又寫廬山支撐天穴,頗見奇特。

    詩風學韓愈,與他為文學韓愈相一緻。

     [82]扺(zhǐ止)掌:擊掌。

    前功捐:是說女娲煉石補天,前功捐棄。

    女娲補天事見《淮南子·覽冥訓》。

     [83](yǔn允)天:意謂天降隕石。

    ,即隕,墜落。

     [84]彭蠡:彭蠡澤、彭澤湖,即鄱陽湖。

    北魏郦道元《水經注·廬江水》三九記彭澤湖中有落星石。

    按:今名德星石。

     [85]“藏山”句:《莊子·大宗師》:“夫藏舟于壑,藏山于澤,謂之固矣。

    然而夜半有力者,負之而走,昧者不知也。

    ” [86]“愚公”句:愚公移山,事見《列子·湯問》。

     [87]恒山:恒山在北方,廬山在南方,所以說是“訛謂”。

    此句一作“黃家亞夫更癡絕”。

     [88]麟史:原指《春秋》,孔子修訂《春秋》至“獲麟”止。

    漢司馬遷《史記·太史公自序》:“至于麟止。

    ”這裡泛指史書。

     [89]牛鬥:牛宿和鬥宿星。

    躔(chán蟬):日月星辰運行的度次和軌迹。

    此句句意不明,或同下句“天穴”有關。

     [90]“天穴”句:形容廬山很高,上接天穴。

    匡廬,即廬山。

    廬山何以稱“匡”,舊說與匡俗這一人物有關,但說法不一。

    《水經注·廬江水》有較詳記載。

    當,承擔,引申為主撐。

     [91]“銀河”兩句:用李白《望廬山瀑布》句意:“飛流直下三千尺,疑是銀河落九天。

    ” [92]槐火:相傳古時随季節變化,燃燒不同柴木,以防時疫,事見《周禮·夏官司爟》。

    漢鄭玄注謂冬天燃槐火。

    槐火節,猶言冬季。

     [93]舣(yǐ蟻)矶:泊船處。

    舣,一曰使船靠岸,一曰舣即正,南方俗謂正船回濟處為舣。

    矶,水邊石灘或突出的岩石。

    ,同“暫”。

     [94]箕踞:一種輕慢、不拘禮節的坐姿,即随意張開兩腿坐着,形似簸箕。

    《莊子·至樂》:“莊子妻死,惠子吊之,莊子則方箕踞鼓盆而歌。

    ”成玄英疏:“箕踞者,垂兩腳如簸箕形也。

    ” [95]舌挢(jiǎo矯):即挢舌,翹舌不能出聲,驚訝貌。

     [96]鄒衍:即驺衍,戰國時人,《史記·荀卿列傳》記“驺衍之術迂大而闳辯”。

    後世以“鄒談”喻善辯。

     [97]“何書”兩句:意為作者與詩僧所談都是沒有出處和根據的。

    烏有,沒有。

    漢司馬相如《子虛賦》中寫“烏有先生”,本無此人,故稱烏有。

    這首詩中屬風趣之言。

     [98]從事公職之人,忙忙碌碌,常有辦不完的公務雜事,由此對季節風光的感受似也遲鈍,待等空閑,此種感受卻又變得敏銳。

    本詩實際上就是表現這種頗有普遍性的心理現象。

     [99]出門:離家。

    京國:國都,猶京城、京師。

     [100]物華:自然景色,這裡指春天的景色。

    五物華,意謂五個春天。

     [101]起:起任,複任。

     [102]這首詩寄贈蕭(jū居)。

    蕭(1241—1318),字維鬥,蒲城人,關中名儒。

    《元史》本傳記他讀書終南山三十年,真履實踐,飽學高行。

    本詩正是描寫了一位高潔之士的形象。

    從詩風看,也見出作者宗漢魏古詩而帶來的特點。

    徵君,通常稱朝廷征聘而不赴之士。

    蕭幾經征聘,都不到任。

     [103]侃侃:和樂貌。

     [104]亹(wěi尾)亹:勤勉。

     [105]“圖史”句:意謂圖書、史籍散布各處。

    圖史,圖書和史籍。

    南朝宋顔延之《宋文皇帝元皇後哀策文》:“進思才淑,傍綜圖史。

    ”紛,猶散布。

    座,座位。

    隅,角落。

     [106]衡門:原意指簡陋的房屋,後常借指隐者所居。

     [107]“種菊”二句:形容高潔之士。

    餐英,以花為食。

    戰國楚屈原《離騷》:“夕餐秋菊之落英。

    ”佩蘭,佩帶香草:晉陶潛《感士不遇賦》:“雖懷瓊而佩蘭。

    ” [108]道腴:謂道之美。

    漢班固《答賓戲》:“味道之腴。

    ”德充符:《莊子》篇名。

     [109]“鳴鶴”四句:意謂蕭被征不出。

    古時征賢之诏書叫鶴闆或鶴書。

    孤雲,喻賢士。

    這四句用比喻手法,形象鮮明,而且交相迎互,古體詩常有這類筆墨。

     [110]“戢戢”句:此句意謂生徒衆多。

    戢(jí集)戢,和諧相聚之意。

    桃李,喻生徒。

    《元史》本傳也記“學者及其門受業者甚衆”。

     [111]羲和:傳說中的禦日之人。

    日禦謂之羲和。

    此句以“春晖”照應“桃李豔”句。

     [112]深儆:猶深省,重于所悟。

     [113]“懷哉”句:此句表達思慕之意。

    屈原《懷沙》:“邈而不可慕。

    ” [114]詩有長序,今略去,從詩序知本詩作于至元二十五年(1288)。

    茅山在江蘇句容東南,為道教勝地,作品中也見出丹丘洞壑之趣。

    詩為絕句,卻有對仗,而且工煉而自然。

     [115]洞:指華陽洞穴,傳說漢代茅盈、茅固和茅衷兄弟三人得道處,世稱“三茅真君”,茅山即以此得名。

    事見《南史·陶弘景傳》。

    花:指洞中流水落花。

    所以下句說“細水流春”。

    詩序中也說洞穴中“涓流赴壑,浮花與俱”。

     [116]“昨夜”句:意謂道觀主人款待作者。

     [117]南華:《南華經》。

    唐天寶年間,诏令《莊子》為《南華真經》。

     [118]“竹杪”句:寫亭在高處,竹林在低處,所以顯得亭子似在竹林之上。

    竹杪,竹的頂端;枕石泉,猶臨石泉,枕,臨近義。

    石泉,即泉水,由泉水多出自山石得名。

    此處意謂泉水在亭後交橫而過。

     [119]“松壇”句:“香霧”即“茶煙”,意謂在松下煮茶。

     [120]“鳥聲”句:意謂夜雨後的晨鳥叫聲更加歡樂。

     [121]鹿夢:《列子·周穆王篇》記鄭人擊斃一鹿,“覆之以蕉,俄而遺其所藏之處,遂以為夢焉”。

    這裡化用典事,意為夢幻真假,夢醒後回憶,夢中别有天地。

     [122]這首詩寫閨思,婦女思念遠出的丈夫。

    清人頗欣賞它。

    這類詩講究含蓄,本詩末句和唐李端《閨情》詩的末句“不忿朝來鵲喜聲”相比,還欠蘊藉。

     [123]鳳翹:鳳形首飾。

    搔鬓:撓掠鬓發,此處同搔首意。

    搔首,有所思貌。

     [124]“一雙”句:此句較含蓄地表現女子思念遠出的丈夫。

     [125]元淮有五首詩詠及白樸的雜劇《梧桐雨》和馬緻遠的雜劇《漢宮秋》、《嶽陽樓》,就詩論詩,非屬上乘,但在元人詩作中詠雜劇詩實為罕見,今選一首。

    題下原注:“仁甫詞”。

    仁甫,白樸字仁甫;詞,這裡指曲,實際上又是指《梧桐雨》。

     [126]“荷減翠”二句:化用《梧桐雨》第二折曲文,原曲全文:“天淡雲閑,列長空數行征雁。

    禦園中夏景初殘,柳添黃,荷減翠,秋蓮脫瓣。

    坐近幽闌,噴清香玉簪花綻。

    ”(〔中呂·粉蝶兒〕)這是一支著名的曲子。

    詩中“雨蓋”指荷葉。

    宋蘇轼《贈劉景文》詩:“荷盡已無擎雨蓋。

    ”黫(yān煙),黑。

     [127]“不煩”句:此句意為不必煩勞紅袖歌舞,“揮纨扇”指歌舞。

    參見趙孟《紀舊遊》詩注〔2〕。

    元淮此句當關及《梧桐雨》劇情,第二折中寫楊玉環登盤演霓裳舞。

     [128]“水鏡池”二句:作者号“水鏡”,或由池名而自号。

    芙蓉,荷花的别名。

    十頃,誇張之言。

    本詩既關及《梧桐雨》,主人公李隆基、楊玉環是極盡富貴之人,故元淮自言他也有“秋富貴”,他的蓮池有十頃之大,屬詩家風趣之言。

    同時,這種以蓮為“富貴”也顯出清高之氣,和李、楊的富貴不同。

     [129]這首詩當寫于至元十三年(1276)。

    是年正月,宋室奉表投降,三月間元軍收括江南州郡軍器,宋福王趙與芮也自浙東到臨安,向元軍請降。

    元軍在浙東等地劫掠漁奪,人民逃亡。

    本詩寫于春夏之交,作家看到破屋煙沙,劫後荒涼。

    首句“馀春草”寫兵後光景,尤為沉痛。

    從戴表元其他詩作印證,此處“邑”指他的家鄉奉化。

    陳養晦,作者友人。

     [130]夏蠶:夏季養的蠶,又叫“二蠶”。

    此句意謂因避亂未及養春蠶,回家後方開始養夏蠶。

     [131]遺民:這裡指劫後遺留下的老人。

    毵毵:垂拂紛披或細長貌。

    唐白居易《寄元微子》詩:“鬓毛不覺白毵毵。

    ” [132]榉(jǔ舉)柳潭:猶柳樹下。

    潭,水邊。

    榉柳,櫃柳,即楓楊。

     [133]丁仙:指丁令威。

    舊題陶潛撰《搜神後記》:“丁令威學道于靈虛山,後化鶴歸遼,徘徊空中而言曰:‘有鳥有鳥丁令威,去家千年今始歸;城郭如故人民非,何不學仙冢累累。

    ’遂高上沖天。

    ” [134]庾老:指庾信。

    他原為南朝梁元帝時官員,後出使北朝西魏被留。

    晚年作《哀江南賦》,感傷遭遇,懷念鄉國。

    事見《北史·庾信傳》。

     [135]戴表元的五言律詩大抵寫來潇灑閑适,對仗句也顯出自行自在,了無斧鑿痕。

    此詩也有這種特色。

    苕溪,今浙江省境内,源出天目山,分東苕、西苕。

    東苕經杭州、德清到湖州。

    此處所寫或是東苕。

     [136]若邪:溪名,在今浙江紹興若耶山下,又名五雲溪。

     [137]漁罾(zēnɡ增):漁網的一種,欲稱扳罾、攔河罾。

     [138]“碧水”句:這句意謂處處是水田。

    塍,田埂。

     [139]這詩作于杭州。

    明田汝成《西湖遊覽志馀》說它“有故國之思焉”。

    從詩意看,“歌者”當是南宋宮廷中的著名樂人。

     [140]檀闆:拍闆,以檀木做成。

    朱絲:朱弦,琴弦。

    錦箋:原意為供題詠書劄之用的精美之紙,這裡引申為書寫,喻這位歌者有文才,能詩詞。

     [141]李龜年:唐開元、天寶年間著名藝人,安史亂後,流落江南。

    杜甫有《江南逢李龜年》詩。

    這裡以李龜年喻那位歌者,表達滄桑變幻之感。

     [142]這首詩一名《錢塘懷古》,但不如此題醒豁。

    宋高宗趙構南渡後在杭州鳳凰山築宮室,這首詩中說“鳳鳥不來山寂寂”,在興亡之感中表現出戀念之情。

    清代顧嗣立在《元詩選》中曾說南宋亡後,遺民故老,寄興吟詠,當時“禁網疏闊”為一種重要條件。

    從仇遠這類詩看,顧說符合事實。

     [143]鸱夷:指春秋時範蠡,他輔佐越王勾踐滅吳後,知勾踐不可以共安樂,浮海他往,并改名姓,自謂“鸱夷子皮”。

    事見《史記·越世家》。

    又,吳王夫差昏庸,伍子胥屈死,夫差又将他的屍體裝入鸱夷(革囊),投之江中,事見《國語·吳語》。

    後有“比幹剖心,子胥鸱夷”之說。

    鸱夷,此喻忠臣。

     [144]荒陵:批南宋王陵。

     [145]門:指城門。

     [146]“征鞍”句:元初,南方反元武裝此起彼落。

    此句有朝代更替,戰禍依舊之歎。

     [147]作者入元後出仕,有被迫因素。

    晚年辭官謝事,就家錢塘。

    這首詩即寫于此時,表現出一種閑适之風。

    二、三聯作流水對,自在而工整,見出詩藝之成熟。

    蔔居,選擇居所。

    也可釋為遷居。

     [148]隐:隐居之所。

     [149]“卻憐”句:此句承上句,原為蔔隐西湖,現在卻又要遷居西湖之東。

     [150]栖霞:西湖邊有栖霞嶺,嶺下有嶽飛墓。

     [151]這首五律不把農村風光來适應作家的隐逸閑适情趣,而是寫得生機盎然,可以看出是受了南宋範成大田園詩的一些影響。

    馀杭,今屬浙江省,元時和錢塘同屬杭州路。

     [152]生意:猶生機。

     [153]“幾家”兩句:舊時習俗,農家養蠶過程中,有所謂“蠶禁”,或叫“蠶忌”。

    明宋雷《西吳枝乘》:“吳興以四月為蠶月,家家閉戶,官府勾攝及裡闬往來慶吊,皆罷不行。

    ” [154]歌詠寺廟,卻借用李白“白發三千丈”詩句,形容作者的深愁,又想把這種深愁銷溶于空門,實際還是離不開愁。

    淨慈寺在西子湖畔。

     [155]奎額:皇帝題的匾額。

    昭回:光昌流麗,形容字勢。

    龍屈盤:也是形容字勢。

     [156]清風五百間:《南史·謝傳》記謝說:“入吾室者,但有清風。

    ”後以清風喻屋室,清高獨行之意,此處喻寺廟。

    五百間,形容寺廟之廣大。

     [157]帝子釜:帝子通常指公主。

    釜是煮饪之器,也可釋為容器。

    帝子釜不詳何物,從下文“金潋滟”,似是盛水的容器,或指某一公主所賜的銅缸之類,寺廟中常有這類器物。

     [158]家人卦:家人,卦名,見《周易》。

    此指家人卦石。

    南屏山西麓,宋時立司馬光家人卦摩崖刻石,上有《家人卦》、《中庸》、《樂記》篇。

    今建有石刻保護亭。

    剔:挑選。

    孱(chán蟬)顔:高峻、峥嵘。

    唐李華《含元殿賦》:“峥嵘孱顔,下視南山。

    ” [159]“西湖”二句:西湖遊人很多,大半都要來南屏山。

    南屏山,在杭州西湖南,山麓有淨慈寺。

     [160]詩寫秋色,一片蕭瑟之氣,但末兩句卻顯出襟懷開闊。

     [161]殘書:指未讀畢的書。

     [162]羽衣:原指用鳥的羽毛制成的衣服,通常喻仙道所穿之衣,也可指仙道之流,此處或指作者所穿羽紗之衣。

    又,蕭國寶身世不詳,或曾為道流,也未可知。

     [163]翠微:這裡指青蔥的山色。

     [164]這首五言絕句寫得很凄苦。

    北周庾信有《秋夜望單飛雁》詩:“失群寒雁聲可憐,夜半單飛在月邊。

    無奈人心複有憶,今暝将渠俱不眠。

    ”蕭國寶詩不寫孤雁悲聲,卻寫孤雁落淚,想象雖虛幻,感情更沉痛。

     [165]虛室:空室,狀住室之簡陋。

     [166]“疏梅”句:此句意謂月光穿過稀疏的梅枝照在床前。

     [167]劉因早年推許李賀,并以“呼我劉昌谷”自豪,他還推崇韓愈,他的古詩長篇明顯地見出受韓、李的影響。

    這首古詩本寫登鎮州(治所在今河北正定)寺廟中的高閣觀太行山,卻匪夷所思,寫出許多神界風光,想象奇特,時空跳躍,色彩濃烈,是他這類詩歌中有代表性的作品。

     [168]麟甲:指雪。

    宋張元《雪》詩:“戰退玉龍三百萬,敗鱗殘甲滿天飛。

    ”此處喻太行山的積雪。

     [169]蟠:盤曲,盤結。

     [170]少微:星名。

     [171]“初疑”兩句:寫太行山之高險,意為可以上接青天。

     [172]“又疑”兩句:有兩層意思,一是寫太行山的幽勝,意謂太行山又像是海上三神山搬移而來。

    舊題前秦王嘉撰《拾遺記》:“海中有三山,其形如壺,方丈曰方壺,蓬萊曰蓬壺,瀛洲曰瀛壺。

    ”二是寫既是三神山移此,可以載我去東海。

    扶桑,意義不一,這裡當指傳說中的東海扶桑神樹。

    舊題漢東方朔《十洲記》:“扶桑在碧海中,樹長數千丈,一千馀圍,兩幹同根。

    更相依倚,日所出處。

    ” [173]“雯華”八句:作者想象他到了三神山,到了日出之地,見到金仙,寫金仙神通廣大。

    雯華,五色祥雲。

    金仙,指佛或神仙。

     [174]“我生”兩句:意謂如果我隻是産生一種幻覺而非看到實象,那麼我的眼睛和肩臂将如何呢?也就是說如何會有這種感覺呢?這裡提到“此臂”,因上文有“拍肩受此金仙翁”。

    安庸,即“庸安”,為了押韻而倒轉,“庸安”即庸讵,反诘之詞。

    《莊子·齊物論》:“庸讵知吾所謂知之非不知耶?庸讵知吾所謂不知之非知耶?” [175]禹鼎:《史記·孝武本紀》:“禹收九牧之金,鑄九鼎……遷于夏商;周德衰,宋之社亡,鼎乃淪伏而不見。

    ”九鼎,象征九州。

     [176]詭态:此處意謂變化多端。

    呼應上句,上句以九鼎沉埋喻朝代變化,世事滄桑。

     [177]金天:這裡指西天。

    月窟:傳說月所生處,喻極西之地。

    梁簡文帝《大法頌》:“西逾月窟,東漸扶桑。

    ”爾:稱金仙。

     [178]須彌峰:佛經《起世因本經》等經籍說南瞻部州等四大洲之中心有須彌山(義譯為妙高峰),在大海中間,頂上為帝釋天所居。

    宋蘇轼《觀湖二首》之一:“須彌有頂低垂日,兜率無根下戴鳌。

    ” [179]“一杯”句:希望借高僧神力,由東海杯度返西,所以下句有“為我返駕随西風”。

    此句用“杯度”事。

    南朝梁慧皎《高僧傳》載南朝宋時有一高僧,神力卓越,常乘木杯度水。

     [180]“堂堂”句:從此句開始,時空又轉換,由神遊回到了現實。

    全趙,指戰國時趙國疆土,鎮州一帶,原屬趙。

     [181]左界:太行山以東。

    重鎮:指鎮州,轄境相當今河北石家莊、正定、阜平和平山一帶。

     [182]土花:久埋于地下的古器物被泥土剝蝕的痕迹。

    宋梅堯臣《讀裴如晦萬裡集書其後》詩:“古溪蠻鐵刀,出冢土花澀。

    ” [183]旗幟:想象之詞,見到霜林,似是當年軍隊的旗幟。

     [184]“乾坤”句:乾坤指天地。

    古代傳說,天地由混沌不分而浮沉、割裂。

    唐徐堅《初學記》引《河圖括地象》:“其氣混沌,清濁既分,伏者為天,偃者為地。

    ”此句形容時間久遠。

     [185]“烏鸢”句:《莊子·列禦寇》:“在上為烏鸢食,在下為蝼蟻食,奪彼與此,何其偏也!”烏鸢,即鸢,猛禽,俗稱鹞鷹,此處喻大。

    蝼蟻,蝼蛄和螞蟻,一說即螞蟻,此處喻小。

    此句為感慨之詞。

     [186]滹水:滹沱河,由山西流入河北。

     [187]王嫱(昭君)遠嫁匈奴是一個著名故事。

    古樂府名有《昭君怨》,《樂府古題要解》說:“漢人憐昭君遠嫁,為作歌詩。

    ”晉人避文帝司馬昭之諱,改昭君為明君。

    南北朝人寫《明君詞》或《明妃曲》的很多,唐宋時代著名作家李白、杜甫和歐陽修、蘇轼都寫過此類作品,大抵注入作家對王昭君故事的評價,或者寄托自己的思想感情。

    也出現千篇一律或者雷同重複的情況,要翻新很不容易。

    劉因此作有一個特色,全篇寫愁寫怨,而且寫來萦纡纏綿,但結尾轉入高亢,幽思離愁的王昭君規勸元帝“要聽新聲譜”,要重譜漢高祖當年高唱的《大風歌》,意味深長。

     [188]“初聞”四句:據晉葛洪《西京雜記》載,漢元帝令畫工為宮人圖形,王嫱不肯向畫工行賄,被畫成醜形,因而不得見元帝。

    本詩寫王嫱初聞畫圖,心中暗喜。

    接着就寫匈奴來使,她被選中北行。

    詩意有跳躍,略去畫成醜形諸事。

     [189]“飛鴻”二句:意謂王嫱北行,途中彈奏琵琶,南飛鴻雁,雖然不解樂聲曲意,卻可把王嫱的離愁帶回故鄉。

     [190]“來時”二句:意謂王嫱離開漢宮時,後宮秋花很多,但旦夕就要飄零,以此象征王嫱薄命。

     [191]猛士歌:即《大風歌》。

    《史記·高祖本紀》載劉邦回鄉時,擊築高歌:“大風起兮雲飛揚,威加海内兮歸故鄉,安得猛士兮守四方。

    ” [192]詩人經過古城,正發思古之幽情,忽然過來一樵夫,含笑問話:“古城距今幾多年?”詩人未及回答,樵夫已行歌遠去。

    形象鮮明、生動。

    元人寫詩,學唐成風,劉因倒是主張轉學多師,但細玩這詩,确有唐詩風韻。

    古城,不明所指,從詩中描寫看,當在易縣、涞水一帶。

     [193]常山:即恒山。

     [194]“易水”句:此句意謂易水在古城南邊。

    襟,原可形容水彙于前,如“襟三江而帶五湖”。

     [195]飛狐:當指飛狐口,一作飛狐關,在今河北涞源縣北蔚縣南,古代要隘。

    連右肩:指在古城西邊。

     [196]撫己:自問、自省。

    晉陶淵明《歲暮和張常侍》詩:“撫己有深懷,履運增慨然。

    ” [197]薪人:樵夫。

     [198]劉因寫過多首詠白溝的詩,這首七律寫來有雄渾之氣。

    黃雲古戍之地,天涯孤劍之身,西風落日,匹馬沖寒,極富形象。

    白溝,即白溝河,宋、遼于此分界,又名界河。

    明代以後,故道已湮。

     [199]薊門:即薊丘,古地名。

    在今北京德勝門外西北隅。

    《史記·樂毅列傳》:“樂毅報遺燕惠王書曰:‘薊丘之植,植于汶篁。

    ’”張守節《正義》:“幽州薊地西北隅,有薊丘。

    ”這裡代指大都一帶。

     [200]上鎮:當指今易縣一帶,境内有長城之險,節制紫荊關、黑石嶺諸重鎮。

    戰國時代燕趙疆域大緻在此劃分。

     [201]“四海”兩句:意謂白溝古戍原為四海聞名之處,今多凋落,我今孤身天涯,竟不知投向何處。

     [202]這也是劉因的七律佳作,既雄渾,又悲涼。

    遂城在今河北保定市徐水區西,作者家鄉在容城,回鄉途經,感到一片悲涼,惟一可安慰的是太行山依舊那樣巍峨聳立。

    “冷煙衰草千家冢”雲雲,或指蒙古軍隊南下時,曾在保定一帶屠城殺戮。

    劉因其他文章中寫到屠城之事。

     [203]鐵城:指遂城,宋将楊延昭曾守戍,遼軍圍攻,百戰不能下,因有“鐵遂城”之稱。

     [204]燕太子:指戰國末年燕王喜的太子,名丹。

    他曾被作為人質送往秦國,逃歸後,派荊轲入秦行刺秦王,未果。

    秦軍攻破燕國時,太子丹又被燕王喜斬首獻給秦國,是諸侯争霸的犧牲者。

    遂城在戰國時名武遂,屬燕。

    事見《史記·燕召公世家》。

     [205]漢公孫:指漢末公孫瓒,曾封薊侯、易侯。

    他曾在今河北雄縣一帶修築營壘,建戰樓數十重。

    《三國志·魏書·公孫瓒傳》載:“為圍塹十重,于塹裡築京,皆高五六丈,為樓其上。

    ” [206]詩寫作者的閑适生活,空鈎釣魚,枕上觀山,清晨在松樹下飲酒,雨後在花叢中寫詩。

    最後兩句轉意,寫自己不懂農桑之事,卻徒然去翻閱前人所寫關于種樹的文章。

    這就使它和一般閑适詩顯出不同。

     [207]便(pián骈):舒适。

     [208]意釣:釣魚時不投餌,不拟得魚,隻求垂釣之趣,叫意釣。

    本是人求其趣,卻說“魚亦樂”,風趣幽默之言。

     [209]“高枕”句:謂枕上觀山,即夢中遊山,自有樂趣。

    山自前,山的形貌自然呈現在眼前。

     [210]種樹篇:即種樹書,古人詩中常以此代表農書,或喻務農隐居。

    《史記·李斯列傳》中記秦始皇焚書,“所不去者醫學、蔔筮、種樹之書”。

     [211]清人全祖望認為劉因與元王朝不合作是出自悲宋、金之亡,“故南悲臨安,北怅蔡州,集賢雖勉受命,終敝履去之”(《宋元學案·靜修學案》)。

    這首詩就是“南悲臨安”之作,當作于至元十三年(1276)元兵攻陷臨安之際。

     [212]西湖處士:指北宋林逋,他隐居杭州西湖孤山,不娶,以種梅養鶴自娛,有“梅妻鶴子”之稱。

    這裡代指杭州。

    元末陶宗儀《辍耕錄》載《宋幼主詩》也以林和靖代指杭州:“寄語林和靖,梅花幾度開?黃金台下客,應是不歸來。

    ” [213]“隻恐”二句:詩句隐約地悲悼南宋之亡。

     [214]這首詩以元滅南宋和宋滅後周對比,明都穆《南濠詩話》評此詩說:“真可謂詩之斧钺矣。

    ” [215]卧榻:此處喻江山社稷。

    據宋曾慥《類說》卷五十三載,宋太祖趙匡胤吞并南唐時說:“卧榻之側,豈可許他人鼾睡。

    ” [216]降王:指趙(xiǎn顯)。

    元至元十三年(1276)春,元軍逼近南宋京城臨安,宋室投降,趙時年不足六歲,稱“幼主”。

    元世祖忽必烈诏谕說:“自古降王必有朝觐之禮。

    ”趙于該年五月抵上都,降封瀛國公。

    皇後弘吉剌氏見後卻不樂,說:“自古無千歲之國,毋使吾子孫及此,則幸矣。

    ” [217]周家七歲兒:指後周世宗柴榮之子宗訓,即恭帝。

    趙匡胤發動“陳橋兵變”,奪取後周政權時,恭帝才七歲。

     [218]程钜夫的一些題畫詩,常由畫面聯想到自己。

    這裡是由山中行路圖想到他家鄉的麻源第三谷,那裡還有南朝謝靈運的遺迹。

     [219]纡萦:回環旋繞。

     [220]羸骖:瘦馬。

    款款:徐緩、緩慢。

    唐杜甫《曲江》詩:“穿花蛱蝶深深見,點水蜻蜓款款飛。

    ” [221]麻源三谷:在江西南城西南麻姑山中。

    南朝宋謝靈運有《入華子岡是麻源第三谷》詩。

     [222]從本詩首句“江漢”雲雲,可知是作者任山南江北道肅政廉訪使時所作。

    “江漢”指送行地點。

    即江陵。

    三、四句有羨慕尹生回鄉之意,因作者也是江西人。

    五、六句遙想尹生歸途見到的風光景色。

    唐杜甫所作送行詩(律詩),五、六句常有這樣寫法,後人也常常效仿。

    第七句“洪崖”用典故,切江西,是說尹生回到家鄉。

    從送行律詩的寫法來說,這首詩歌卻也有句有章,章法嚴整。

     [223]輸:不如、不及。

     [224]洪崖:傳說中的仙人名,晉郭璞《遊仙》詩有“右拍洪崖肩”句。

    據清顧祖禹《讀史方輿紀要》卷八四記載,江西新建縣有伏龍山,相傳是洪崖先生得道處。

    郭詩所寫“洪崖”指上古仙人,與伏虎山傳說中“洪崖先生”當非指一人,疑此詩把兩個典事混用,以便切合江西。

     [225]黃花:即菊花。

    因為尹生離江陵時已秋深,所以說“傥有”,或有、如果有之意。

    傥,同“倘。

    ” [226]吳澄詩歌以五言見長。

    這首五律于雅淡風格中見出情蘊意濃。

    富州,今江西豐城。

    如京,往京。

     [227]數數:急迫。

     [228]“别意”二句:上句猶謂惜别之意長,長過萬裡。

    下句猶謂片語可見交情深,不需千言萬語。

    又“别意萬裡外”連用五個仄聲字,唐人的古體詩或五言絕句中有此種現象,此處卻用在律詩中,屬罕見的拗句。

     [229]病鶴:作者自喻。

     [230]自東晉以來,采石矶不僅是兵家必争之地,也是詩人詠懷吊古之所。

    這首詩寫到的虞雍國即虞允文,南宋高宗年間,他在采石督軍大破金兵。

     [231]采石矶:在今安徽馬鞍山市長江東岸,自古為江防重地。

     [232]“南北”句:語本《隋書》卷五十二:“陳氏憑長江之地險,恃金陵之馀氣,以為天限南北,人莫能窺。

    ”限:阻、界。

     [233]“江山”句:此句謂江山依舊,人事已非。

     [234]一去不來:據《宋史·虞允文傳》,虞允文并非采石守将,他隻是奉命犒軍,逢主将罷職,金兵來攻,他毅然督軍,獲大勝,不久即往川、陝任職。

     [235]渡馬:指金兵。

     [236]這是作者參拜嶽飛墓之作。

    首句即鋒芒畢露,所以明人汪循說此詩流露了作者“平生不可以告人者”之“大節”,清代四庫館臣則稱贊它“不失雅韻”。

    嶽鄂王墓,即嶽飛墓,在杭州栖霞嶺。

    參見本書趙孟《嶽鄂王墓》詩及注。

     [237]交頤:猶滿腮。

    宋陳亮《祭徐子宜内子宋氏恭人文》:“矧姑鐘愛,涕淚交頤。

    ” [238]鸩毛:鸩,鳥名,又名運日。

    漢王逸《楚辭章句》中《離騷》注雲:“鸩,運日也,羽有毒,可殺人。

    ”此處喻陷害嶽飛的人。

     [239]龍渡:當是以司馬睿(晉元帝)南渡建立東晉事喻趙構(宋高宗)南渡建立南宋。

    《晉書·元帝紀》載:西晉“太安之際,童謠雲:‘五馬浮渡江,一馬化為龍。

    ’及永嘉中,歲鎮熒惑,大白聚鬥牛之間,識者以為吳越之地當興王者,是歲王室淪覆,帝(按:指司馬睿,時為琅琊王)與西陽、汝南、南頓、彭城五王獲濟,而帝竟登大位焉”。

     [240]桧:桧樹,也稱桧柏。

    此句喻百姓痛恨秦桧。

     [241]描寫偏遠的農村,隻有樵路通行,數椽茅屋,人家很少,但别有風光。

     [242]暗:伏、藏。

    蒺藜:蔓生有刺的草。

     [243]茅(jué絕):束茅立于地面,叫茅。

    這裡代指茅屋。

     [244]樾:蔭。

     [245]蒼鵝:猶白鵝,蒼可以指白色或灰白色。

    陂:池塘。

     [246]記日:猶會日、屆日,與下句“上時”同義。

    上時:猶到時。

    地栗:即荸荠。

     [247]慚愧:這裡應解作幸喜、難得之意。

    唐元稹《夢李紳》詩:“慚愧夢魂無遠近,不辭風雨到長灘。

    ” [248]泊舟野望,大地回春,風物更妍,但作者忽然感到茫然,即俗語所謂有一種說不出的情思和意念。

     [249]野鹳:水鹳,食魚鳥。

    漁笱(ɡǒu苟):捕魚的竹籠,魚能入不能出。

     [250]搔首:有所思貌。

     [251]本詩為名篇,在元代就很流傳,明清時代一些詩話著作中也常提到它。

    由于趙孟以宋室子孫出仕元朝,人們常以此詩來說明他的複雜心态。

    但也引起過異議,虞集就不同意第三句的寫法,以為指宋高宗趙構誤信秦桧一事則可,泛說“君臣”則不可。

    後人翻刻趙孟詩集,遂有将“君臣”改作“衣冠”的,實不足取。

    而且趙孟的《聞搗衣詩》中已有“南渡衣冠不及前”之句。

    嶽飛墓在杭州西湖栖霞嶺。

    南宋甯宗嘉定四年(1211)追封嶽飛為鄂王。

     [252]離離:茂盛貌。

     [253]石獸:列在墓前神道的石馬和石獅之類。

    危:形容高高屹立。

    唐封演《封氏聞見記》:“然則墓前石人、石獸、石柱之屬,自漢代而有之矣。

    ” [254]社稷:代指國家。

     [255]“中原”句:此句化用宋範成大《州橋》詩意:“州橋南北是天街,父老年年等駕回。

    忍淚失聲詢使者,幾時真有六軍來?”又宋韓元吉《望靈壽緻拜祖茔》也寫“殷勤父老如相識,隻問天兵早晚來”。

    範、韓均曾為南宋出使金朝的使臣。

     [256]“莫向”二句:把自然景物拟人化,意謂不要向西湖吟誦這首詩歌吧,以免引出它的不盡悲傷。

     [257]詩當作于宋亡之後、作者出仕元朝之前,此時作者家境艱難,常靠親友接濟。

    詩寫春愁,尾聯更顯孤寂感。

    章得一,作者友人,身世未詳。

    次韻,和詩的一種,不僅同韻,而且韻腳先後都與所和詩作一樣,也稱“步韻”。

     [258]清漣:謂水清澈而有細波紋。

    語本《詩經·魏風·伐檀》:“河水清且漣猗。

    ”後多連文。

    南朝宋謝靈運《過始甯墅》詩:“白雲抱幽石,綠筱媚清漣。

    ” [259]陶令:陶淵明。

    此處當代指章得一。

     [260]郦生:郦食其,秦漢之際人,曾為裡監門吏。

    家貧,好飲酒,人稱“狂生”。

    《史記·郦生列傳》記他被劉邦侮慢,複又禮遇。

    後為劉邦遊說齊王田廣,被烹。

    這裡當取“狂生”意,作者自喻。

     [261]晴絲:即遊絲,蟲類所吐之絲在空中飄遊,此種現象在明媚春日中最易見到。

     [262]前六句紀昔日遊樂,末兩句寫如今寂寞,其實這種寂寞非關景物,而是一種心态。

     [263]“落紅”二句:描寫女樂歌舞。

    以歌扇、舞衣代指樂舞。

    唐杜甫《數陪李梓州泛江》詩:“江清歌扇底,野曠舞衣前。

    ”歌扇,歌舞時的器具。

    一說扇上記有歌曲名,供點唱用,謂之歌扇。

     [264]金鴨:銅制的鴨形香爐。

    唐戴叔倫《春怨》詩:“金鴨香消欲斷魂,梨花春雨掩重門。

    ” [265]撾(zhuā抓):打,敲打。

     [266]這兩首七絕寫出了作者初到大都任職時的複雜心情。

    前一首全是興奮之情,後一首有思鄉之念。

    清人顧嗣立《元詩選》隻選後一首,或許不完全從藝術角度出發,顧氏曾稱贊趙孟“自悔”之“宜”。

     [267]海上:原注:“北方謂水泊為海子。

    ”按:海子,又稱海,如北海、什刹海。

     [268]五雲:原指雲的五種顔色,後演變為指瑞雲,多作吉祥的征兆。

    《南齊書·樂志》:“聖祖降,五雲集。

    ” [269]鈞天:天之中央。

    《呂氏春秋·有始》:“中央曰鈞天。

    ”這裡借指帝都。

    句意是今日能到帝都,恰如做夢一樣。

     [270]原作二首:題梅和題竹,這裡選錄題梅一首。

    趙孟是著名書畫家,他在這方面的聲名和成就超過他作為詩人的成就。

    他的題畫文大抵是對畫面的解說,題畫詩則往往是對畫面的補充。

    石民瞻,作者的朋友。

     [271]故人:原注:“伯機有詩見寄雲:‘寄聲霅上佳公子,飛盡梅花不見君。

    ’”由此知故人指鮮于樞。

    詳見本書小傳。

     [272]寒玉:通常用來比喻水或竹,這裡喻梅。

     [273]這首《早春》詩描寫早春的景色:草的嫩芽開始發綠,柳眼則由黃而泛青。

    這本很平常,但詩中“随意綠”、“向人青”詩語都富有人情味,草芽、柳眼所代表的春似乎是由于喜愛人間,順從人們的心意而不聲不響地回歸大地的,這是以春的惠人反寫人的愛春。

    但末句轉意,寫歌聲傳愁,這就是所謂蕩開作結詩法。

     [274]無賴:可愛。

    唐杜甫《奉陪鄭驸馬韋曲》:“韋曲花無賴,家家惱殺人。

    ” [275]柳眼:柳芽。

    向人青:《晉書·阮籍傳》載,阮籍能為青白眼,見凡俗之土,以白眼對之,見相投之人,乃用青眼。

     [276]“微波”句:意謂微波晃亂星光。

    按景象說,應在上句日照霧散之前,在詩句排列上分明颠倒,近體詩中有此手法。

     [277]“誰歌”句:采曲,《詩經·召南》有《采》篇,“于以采,南澗之濱。

    ”舊注認為嫁女之前先要祭祀,祭時用藻,所以要“采”、“采藻”。

    這首《早春》詩中寫采曲“愁絕”,是以明媚的春光反襯女子的憂愁。

    ,一種水草,又稱大萍,田字草。

     [278]馬臻生于宋,元兵破臨安時為二十三歲。

    他在詩中不止一次回憶“年少承平之樂”,他是在宋亡後“投迹空林”的。

    他雖成為能“行醮”的道士,但詩中常不忘情于世事。

    這首詩中寫“閑憶”少年之日,看似用筆很輕,但接下去“隻疑樂事是前身”卻是沉重之筆,第三聯“剩水殘山”就更點出亡國之痛。

    謾,通“漫”。

    詩家以“謾成”作詩題,猶随意而成。

     [279]脈脈:形容神思之長,所以下文有“損神”語。

     [280]可惜:猶可憐。

     [281]仇仁近即仇遠,事迹詳見本書小傳。

    入元後曾為官,但并不熱中,也有認為他是被迫出任儒官。

    馬臻另一首《和山村見寄詩韻》中說“休将野服染缁塵,大患須知為有身”,是在仇遠未出仕前所贈,本詩則說“且向吟邊了身世”,可見出他們之間的思想感情息息相通。

    從末二句可知此詩當作于仇遠晚年任杭州路總管府知事時。

    詩寫得很平易,但友情很真摯。

     [282]三疊:見許衡《别友人》注〔5〕。

     [283]白雪:古琴曲名,傳為春秋晉師曠所作,後用以喻指高雅的詩詞。

    唐羅隐《秋日有酬》詩:“腰間印佩黃金重,卷裡詩裁白雪高。

    ”這裡喻仇遠寄詩。

     [284]賀公:指唐代詩人賀知章,《舊唐書·賀知章傳》記他自号“四明狂客”,晚年返鄉為道士。

    此句自喻。

     [285]鄭老:指唐代鄭虔,曾任廣文館博士,《新唐書·鄭虔傳》記他“在官貧約。

    ”杜甫《醉時歌》詩詠鄭虔說:“廣文先生官獨冷。

    ”冷官,指無實權的職位。

    馬臻此句句意是說仇遠安于冷官。

     [286]本詩前六句都寫聲響,更加确切地說,應當是除第二句寫等待聽到雞啼外,其他五句都寫聲響:雨聲、風聲和雷電聲。

     [287]“老屋”句:意為老屋漏雨。

    淙淙,水滴聲。

     [288]“四檐”句:寫屋檐雨水注瀉之多而猛。

     [289]寒聲:猶風聲。

    萬弩:弩,用機械發射的弓。

    此處以萬弩齊發喻風聲之大之烈。

     [290]飛雪:當為“飛電”之誤。

    寶鑒:鏡子,此處喻光亮。

    閃電有聲,所以說“聞”。

     [291]鼙(pí皮):古代軍中所用的一種小鼓,漢以後亦名騎鼓。

    唐李白《戰城南》詩:“妾家夫與兒,俱在鼙聲裡。

    ”此處喻雷聲。

     [292]“平明”二句:承上兩句寫雷電而來,古時有雷公電母之說,意即天神。

    此句轉意,寫雨後溪漲,所以說“點檢人間事”。

     [293]本詩寫西湖船娘,實為倡女。

    惟當時也有的船娘因欠官錢,被迫賣笑的。

    元陶宗儀《辍耕錄》記杭州府判王某逼良為倡,鮮于樞因作此詩。

    但詩意有普遍性,實為對此類不幸女子寄予同情。

    在古今不計其數的描寫西湖的詩歌中,此詩别呈一格。

     [294]纏頭:古時對歌妓舞女的賞賜。

    唐白居易《琵琶行》:“五陵少年争纏頭,一曲紅绡不知數。

    ” [295]熊蹯(fán煩):即熊掌。

    《左傳·文公元年》:“十月,以宮甲圍成王。

    王請食熊蹯而死,弗聽,丁未,王缢。

    ” [296]陽台:戰國楚宋玉《高唐賦》序:“昔者先王嘗遊高唐,怠而晝寝,夢見一婦人,曰:‘妾巫山之女也,為高唐之客,聞君遊高唐,願薦枕楰。

    ’王因幸之。

    去而辭曰:‘妾在巫山之陽,高丘之岨,旦為朝雲,暮為行雨,朝朝暮暮,陽台之下。

    ’”後遂以“陽台”為男女歡會之所。

    南唐嚴續姬《贈别》詩:“風柳搖搖無定枝,陽台雲雨夢中歸。

    ” [297]桑濮(pú葡):桑間濮上的簡稱。

    《禮記·樂記》:“桑間濮上之音,靡靡之音也。

    ”也喻男女幽會場所。

    《漢書·地理志》記衛地“有桑間濮上之限,男女亦亟聚會,聲色生也”。

    行露:《詩經·國風·召南》篇名,舊解以為篇意是女子以禮自守,拒絕強暴。

     [298]這首五絕寫閑官生活,很見情趣。

    元吳師道《吳禮部詩話》:“鮮于伯機初至婺,題詩于屏”。

    吳并贊為“佳句”。

     [299]“廨舍”句:意謂為官很清閑。

    廨(xiè謝)舍,官舍、官署。

     [300]“官曹”句:喻職微。

    馬曹,管馬的官署。

     [301]岸:此指露額。

     [302]手闆:即笏,谒見上司時所執。

     [303]鎮江金山并不算高,本詩卻把它寫得很峻拔,又想象它勝過傳說中的蓬萊山。

    第二句寫金山矗立江中,形象渲染,也極誇張。

     [304]嵯峨:原指山高峻貌。

    也可狀他物。

    唐唐彥謙《送許戶曹》詩:“将軍樓船發浩歌,雲樯高插天嵯峨。

    ”這裡狀塔。

     [305]爛銀:形容在陽光照耀下的江水反射出一片光亮。

    從唐盧仝《月蝕》詩句“爛銀盤從海底出”化來。

    紫金峰:當指金山的最高處金鳌峰。

     [306]壓:迫近、超越。

    第一宮:指金山寺,即江天寺。

     [307]郭璞墳:郭璞,晉人,博學多才,後被王敦所殺。

    《晉書》有傳。

    金山下有他的墓。

     [308]萬佛塔裝有多盞塔燈,塔在鎮江焦山之巅。

    詩詠塔燈,末聯把塔想象是“倒提鐵筆”,頗奇特。

     [309]“半夜”二句:意謂塔燈照耀無所不及,上際于天,下蟠于地。

     [310]滟滪:滟滪堆,長江三峽中的險灘。

    沿:緣水而行。

    珠蚌:代指珠光。

    猶言塔燈之光可照到滟滪堆,像緣水相沿的明亮珠光。

     [311]照水犀:即燃犀。

    《晉書·溫峤傳》記溫峤到牛渚矶,因聽到水下多怪物的傳說,“遂毀犀角而照之”。

    此句說塔燈如同燃犀一樣也能探照水下。

     [312]“文焰”二句:塔似“倒提鐵筆”,向空題字,就有“文焰”,猶文章的光焰。

    文焰屬虛拟,卻可借物象來表達,唐孟郊《訪嵩山道士不遇》詩:“先生五兵遊,文焰藏金鼎。

    ” [313]這首詩描寫賈似道的私宅,實際上又是寫賈似道由當年的窮奢極欲到後來的身敗名裂。

    元人詩作中寫賈宅的,還有黃庚的《故相賈秋壑舊府》等。

    葛嶺,在杭州西湖邊,傳說晉人葛洪曾在此煉丹,因名葛嶺。

     [314]相君:指賈似道,曾任丞相、平章軍國重事,并加銜太師。

    “相”本是輔佐君主之意,故又稱相君。

     [315]通衢:四通八達的道路。

     [316]錢:通“泉”,泉流花間。

    用“錢”字是為了避免與下句泉字相犯。

    甃(zhòu皺)作徑:以磚砌井,此處指泉徑。

     [317]錦:彩石。

    黃庚詠賈相宅詩有“花石拟平泉”句。

     [318]麒麟銀裳:即麒麟袍,通常是武官所穿,袍上有銀絲為飾。

    龍绡:以生線繡成龍形。

     [319]文螺:貝類,有花紋的海螺。

    木難珠:寶石之名,色黃。

     [320]阘(tà踏)戟:即長戟。

     [321]駝蹄:駱駝的蹄足,号為七寶羹,珍貴食品。

     [322]伊尹:商代賢相。

    周公:即姬旦,周成王之叔,成王幼時,曾攝政。

     [323]瓦裂:像瓦片一樣碎裂。

    比喻分裂或崩潰破敗。

    《尚書大傳》卷三:“纣之卒輻分,纣之車瓦裂。

    ” [324]铛:鍋。

     [325]琨、瑤:皆美石。

    《尚書·禹貢》:“厥貢惟金三品。

    瑤、琨、筱。

    ”孔傳:“琨、瑤皆美石。

    ”孔穎達疏:“王肅雲:‘琨、瑤,美石次玉者也。

    ’” [326]狙:猕猴。

     [327]闆牆複壁:指假牆複壁。

     [328]欷歔:歎息聲。

     [329]淩煙圖:唐太宗李世民建淩煙閣,内繪功臣圖像。

    事見《舊唐書·太宗本紀》。

    此處喻禦碑。

     [330]這首五古是陳孚佳作。

    唐代柳宗元有傳誦名作《江雪》:“千山鳥飛絕,萬徑人蹤滅。

    孤舟蓑笠翁,獨釣寒江雪。

    ”陳詩或受其影響。

    第三句全部用仄聲,也是唐人傳統。

     [331]巴陵:即嶽陽,在洞庭湖邊。

     [332]一蓑:喻漁翁,也可喻小漁舟。

     [333]這首律詩也是陳孚的佳作,句格莊嚴,明人胡應麟尤其欣賞詩中的颔聯,在《詩薮》中拈出,“以俟知音”。

    鄂渚,指今武漢,故首句即寫到黃鶴樓,末句寫到武昌。

     [334]庾令:指晉代庾亮,字元規,權重一時,王導對他不滿,一日大風揚塵,王以扇拂塵,說:“元規塵污人。

    ”後人詩中“庾公塵”常喻權勢。

    事見《世說新語·輕诋》。

    簡冊:有各種含意,此處當指史冊。

     [335]祢生:當指三國時人祢衡。

    《後漢書·祢衡傳》記他“淑質貞亮,英才卓跞”。

    因恃才傲物,在江夏被黃祖所殺,作有《鹦鹉賦》。

    祢衡滿腹文章,卻英年被殺,葬于武漢,至元代墓已無存(今武漢漢陽區龜山南麓祢衡墓為2000年重建),故雲“無土蓋文章”。

    詩詠鄂渚,故用庾亮、祢衡事。

     [336]行人:使者。

    這首詩寫于作者以副使身份出使安南(今越南)途中。

     [337]“盧溝曉月”,在元代已是燕京八景之一,有好多詩作詠及。

    本詩從作者騎馬路過盧溝橋的角度來寫,而不是靜止地描寫。

     [338]滉漾:原形容流水,此處當是形容橋上覆有薄霜的石闌,不然就與第三句相犯。

    白石闌幹上有微霜,更加澄明,騎馬行進中看去,似在搖動。

    由于注意觀看欄幹,所以下句寫“馬度石橋人未覺”。

     [339]“停鞭”句:猶言不策馬快行,讓它在柳蔭叢中慢慢行走。

    立盡,盡立,形容柳多。

     [340]滅沒:《列子·說符》:“天下之馬者,若滅若沒,若亡若失。

    ”後以“滅沒”形容跑得極快。

    《淮南子·兵略訓》:“剽疾輕悍,勇敢輕敵,疾若滅沒,此善用輕出奇者也。

    ”這裡喻鳥飛。

     [341]淨江寺在杭州。

    詩的前六句盡寫風景,末兩句流露江山依舊、朝代更疊之感。

     [342]巋(kuī虧)然:高大獨立貌。

    傑:高大聳立。

     [343]金碧界:指寺院。

    唐白居易《遊悟真寺》詩:“栾栌與戶牖,恰恰金碧繁。

    ” [344]風景不殊:西晉滅亡後,晉元帝在江南重建晉王朝。

    過江人士暇日相逢宴飲于新亭(在今江蘇南京)。

    大将軍周中坐而歎曰:“風景不殊,舉目有江山之異。

    ”見《晉書·王導傳》。

    後即以“風景不殊”悲歎國土破碎或淪亡。

     [345]吳山:又名胥山或城隍山,在今杭州市内。

    錢塘:指錢塘江。

     [346]這詩寫了一個隐者遁世的心情,末兩句點出這位隐者站在漢民族立場,與元王朝不合作。

    “漁隐”,并不指以漁為業而為隐士者,隻是“扁舟寄此情”而已。

    颔聯以“釣絲”與“塵網”相對,更可見出以“漁”為“隐”。

    漢東方朔《與友人書》:“不可使塵網名缰拘鎖。

    ” [347]鷗鹭盟:猶鷗盟,謂與鷗鳥為友,比喻隐退。

    宋陸遊《夙興》詩:“鶴怨憑誰解,鷗盟恐已寒。

    ” [348]狂奴台:即嚴子陵釣台,在浙江桐廬。

    嚴光(字子陵)曾與劉秀同學,劉秀稱帝後,召他至洛陽,但他不肯接受官職,後歸隐富春山。

    劉秀曾說嚴光是“狂奴”。

    事見《後漢書·嚴光傳》。

     [349]作者與友人同宿山館,談心聊天,不覺夜深,忽然相互才覺得非是少年光景,以兀起之筆引出感傷之情。

    結尾卻寫夜闌更深,别有未眠之人,原來是農夫在喂牛。

    結句顯得韻味自然。

    架閣,官名。

    架閣官以掌藏簿籍文案得名。

     [350]移席:移座。

    汀:原意水之平,引申為水邊平地,小洲。

     [351]鬥:鬥星。

    天末:猶天際。

     [352]鱗:指雲的形狀。

    雨馀天:猶雨後天。

    馀,剩的引申義,猶後。

     [353]從作者家鄉漢中到大都,長途跋涉,當很辛苦,詩中“憔悴”雲雲,也可視為實況,但由此反映出的心情,也很淡泊,和那些初至京城任官時抱着興奮心情的人不同,隐約傳達出無奈心态。

     [354]僦(jiù就):租賃。

     [355]館閣:作者在翰林國史院任職,故稱館閣。

     [356]敢望:豈敢望。

     [357]馮子振對這兩首吊李白墓的詩很稱贊,說如果李白複活,“亦當為子虛擊節”。

    這個評論有溢美之處,但它們所表達的感情在元代士子中有相當的代表性。

    李翰林,指李白。

    唐天寶元年(742),李白被召入京,為翰林供奉。

     [358]明時:指政治清明的時代。

    三國魏曹植《求自試表》:“志欲自效于明時,立功于聖世。

    ” [359]賀監:指賀知章,嘗官秘書監,晚年自号秘書外監。

    新舊《唐書·李白傳》都記載李白初到京師,賀知章一見,驚歎為“谪仙人”。

     [360]金馬诏:漢代征士,以才技征召而未有正官者,使之待诏金馬門,備顧問。

    待诏,猶等候任命。

    唐代無待诏金馬之設,凡被征之士均置翰林院以待诏。

    後遂以待诏命官。

     [361]“失意”句:唐李濬《松窗雜錄》記高力士向楊玉環進讒,說李白所寫《清平調》是譏刺楊玉環,因而緻罪。

     [362]三闾:三闾大夫,即屈原。

     [363]四皓:指秦末避亂商山的四位高齡隐士:東園公、甪(lù路)裡先生、绮裡季和夏黃公。

    張良曾用計,迎四皓以佐太子。

    事見《史記·留侯世家》。

     [364]“匡山”句:杜甫思念李白的《不見》詩中寫道:“匡山讀書處,頭白好歸來。

    ”有的注家考李白幼時讀書于江油大匡山,一說匡山為廬山。

    見姚燧《清明日陪詩僧登落星寺》詩注〔7〕。

     [365]騎鲸:李白自署“海上騎鲸客”。

    但“騎鲸”也可指死亡,此處意謂李白死去。

     [366]謝山茔:指李白墓。

    李白生前,喜謝家青山,願死後葬于此,及卒,葬于仙龍山。

    後範傳正應李白孫女的請求,遷葬青山。

    事見唐範傳正《唐左拾遺翰林學士李公新墓碑》。

     [367]“落月”句:此句與五六句都是寫李白醉入水中捉月而亡。

    此據五代王定保《唐摭言》所載,實為傳說,但後世作家依舊喜歡采用這個傳說,以之入詩或入劇。

     [368]長庚:長庚星,即太白星。

    因李白字太白,故以太白星喻指。

     [369]宋無主張詩學晚唐,這首詩即是他的實踐之一。

     [370]“桃花”句:此句當是說桃花源難尋。

    晉陶淵明《桃花源記》記武陵人逢桃花林,穿林而過,進入桃花源。

     [371]“身黃”二句:寫松鼠和白頭翁(鳥)。

    這樣的對仗句有斧鑿之嫌。

    學晚唐不當,嘗有此類現象。

     [372]避秦:也用桃花源事。

    桃花源中人說:“先世避秦時亂,率妻子邑人,來此絕境。

    ”前句說難尋,末句說“應有”,加深對遠離塵嚣的山林幽深意境的刻畫。

     [373]唐王維《老将行》中寫一位老将被棄置,“世事蹉跎成白首”,但又寫他不服老,還想參戰,“猶堪一戰立功勳”。

    本詩卻洋溢着一片感傷。

     [374]太白:太白星。

    《史記·天官書》:“當其行,太白逮之,破軍殺将。

    ”太白星主殺伐,古人詩中用來喻兵戰。

    唐李益《再赴渭北使府留别》詩:“列嶂高烽舉,當營太白低。

    ” [375]“舊時”二句:意謂昔日部下飛黃騰達的人不來相問,在戰場上死去的更無法再相見。

    既有世态炎涼的感慨,又有憐惜部下的傷悲。

    警策之句。

     [376]後代史家批評南宋第一個皇帝趙構偏安江南,不圖收複中原,出于個人私利,因為中原收複,涉及迎回被俘的徽宗和欽宗。

    宋無這首詩的末句也有類似鋒芒。

     [377]故都:指北宋都城汴京(今河南開封),這裡意謂故都之民。

    銮:銮駕,皇帝車駕。

     [378]錦繡湖山:指南宋都城臨安(今浙江杭州)。

     [379]銷金鍋子:宋末元初周密《武林舊事》中記“西湖遊幸”與“都人遊覽”雲:“貴珰要地,大賈豪民,買笑千金,呼盧百萬”,“日縻金錢,靡有紀極,故杭諺有銷金鍋兒之号,此語不為過也”。

     [380]龍沙:原意指古時西北沙漠之地。

    《後漢書·班超傳贊》:“坦步蔥雪,咫尺龍沙。

    ”李賢注:“蔥嶺雪山,白龍堆沙漠也。

    ”後泛指邊塞地區。

    這裡則指金朝的五國城(今黑龍江依蘭)。

    兩宮:指北宋最後兩個皇帝徽宗和欽宗,他們被金朝俘擄,居五國城。

     [381]這首詩低哀消沉。

    作者入元後生活了六十多年,但堅持不出仕,以遺民自居。

    “天地遺民老”,就是一種感傷之情,但下句“山河霸業空”卻隻是由主體感受作出的描寫,具有主觀色彩,同那些寫英雄失敗而引出的具體感慨有差異。

     [382]放迹:猶浪迹,到處漂泊。

    《新唐書·韓思彥傳》:“至官閱月,自免去,放迹江淮間。

    ” [383]歲窮:一年将盡,猶年盡、年終。

     [384]“孰能”二句:意為誰能使時光倒流?我真想問問蒼天。

     [385]即事,原意為當前事物。

    感事之詩,多以“即事”标題。

    由這首詩的最後兩句,使人聯想起唐李商隐的《晚晴》詩句:“人間重晚晴”,這是一種樂觀精神。

     [386]屐:木屐,底部有齒,便于行走泥濘地。

     [387]心會:猶會心。

     [388]袁易詩中有不少感情凄苦的作品,這或許同他在出仕問題上的矛盾心态有關,也同他在生活中遇到的艱難有關。

    這種感情似具體卻又不具體。

    這首七律就是詩藝圓熟,感情凄苦之作。

     [389]襟期:猶懷抱。

    唐杜甫《醉時歌》詩:“日籴太倉五千米,時赴鄭老同襟期。

    ”子:指友人。

     [390]判:同“拚”,不顧。

     [391]晼(wǎn碗)晚:年将老,老年時期。

    晉陸機《歎逝賦》:“時飄忽其不再,老晼晚其将及。

    ”劉良注:“晼晚,日暮也,比人年老也。

    ” [392]井桐:梧桐葉凋。

    南朝梁庾肩吾《九日侍宴》詩:“玉釀吹岩菊,銀床落井桐。

    ”唐李白《贈别舍人弟之江南》詩:“梧桐落金井,一葉飛銀床。

    ” [393]搖落:秋天草木凋零。

    戰國楚宋玉《九辯》:“蕭瑟兮草木搖落而變衰。

    ”此處有喻自己飄零之意。

     [394]作者于石洞書院山長任罷後,居吳淞,築“靜春堂”,過着閑适生活。

    從這首絕句也可看出他閑适情趣。

    在風格上屬于前人所說的“詩律細”的作品。

    首夏,即初夏。

     [395]“穿徑”句:竹林幽深,地上滿布青苔,所以說穿徑“破嫩苔”。

    幽篁,竹林。

     [396]潑:溢、倒。

    醅(pēi胚):指酒,古人常有“綠酒”之說,這裡用潑新醅來形容池中綠水漲溢。

     [397]黧黃:色黑而黃。

     [398]翠碧:當指池邊樹木。

     [399]清人王士禛、顧嗣立都欣賞何中的五言詩,認為有“唐賢風味”。

    這首五律寫春日傷情,實有亂離之感,于惘然中見凝重。

     [400]亂離:指遭逢戰禍而流離。

    也可釋作戰禍。

    唐杜甫《遣憂》詩:“亂離知又甚,消息苦難真。

    ” [401]這是一首受王士禛稱贊的閑适詩,作為五律,略有點拗,如以“碧溪”對“白鷗”,“小雨十數點”連用五個仄聲字
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